तो रिकार्ड तोड़ होगा फलों का उत्पादन

कुल्लू। पर्याप्त बारिश और हिमपात के चलते इस बार देवभूमि कुल्लू में फलों का रिकार्ड उत्पादन होने की उम्मीद है। अभी तक के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जिला में साल 2010 में सबसे अधिक 2.17 लाख मीट्रिक टन फलों की पैदावार हुई थी। लेकिन इस साल का उत्पादन लक्ष्य को भी पीछे छोड़ कर 2.24 लाख मीट्रिक टन तक हो सकता है। बागवानी विभाग की रिपोर्ट में किवी तथा अनार के फलों के आकलन को शामिल नहीं किया है। ऐसे में फलों का उत्पादन और भी बढ़ने की संभावना है। हालांकि यह सब मौसम पर निर्भर करेगा।
फलों के लिए मशहूर कुल्लू घाटी में सेब की बंपर और रिकार्ड तोड़ उत्पादन की संभावना है। बीते साल घाटी में सेब 1.21 लाख मीट्रिक टन उत्पादन रहा था। इस साल फलों का उत्पादन 40 फीसदी बढ़कर 2.04 लाख मीट्रिक टन रहने के आसार हैं। साल 2010 में हुई सेब की बंपर फसल से 80 लाख सेब पेटियां हुई थीं। इस बार यहां आंकड़ा एक करोड़ तक पहुंचने जा रहा है।
फलों के लिए सबसे अधिक नुकसानदेह आंधी-तूफान और ओलावृष्टि मानी जाती है। लेकिन फिलहाल ऐसा खतरा मौसम वैज्ञानिक नहीं जता रहे हैं। फलों के लिए नुकसान का समय 15 अप्रैल से लेकर 15 मई तक रहता है। जिला उद्यान विभाग के उपनिदेशक डा. बीसी राणा ने बताया कि विभागीय फिल्ड रिपोर्ट में इस साल घाटी में रिकार्ड तोड़ फलों का उत्पादन होने की संभावना है। अनार और किवी को छोड़कर सेब, नाशपती, पलम, आडू, खुमानी की बंपर पैदावारी के संकेत मिले हैं। जिला में अभी तक रिकार्ड 2.17 लाख मीट्रिक टन फल का उत्पादन 2010 में हुआ था। इस बार की सर्वे रिपोर्ट में
2.24 लाख मीट्रिक फलों की पैदावार होने का अनुमान है। इसमें सेब का उत्पादन 2.04 मीट्रिक टन रहने की संभावना है। यह करीब एक करोड़ सेब पेटी होगा।

किस साल कितनी पैदावार
साल उत्पादन मीट्रिक टन में
2000 75087
2001 52575
2002 83764
2003 113936
2004 179304
2005 151681
2006 78784
2007 155754
2008 85543
2009 77272
2010 217406
2011 58540
2012 163031
2013 224000 (अनुमानित)

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